बच्चों के शारीरिक व मानसिक विकास को सुनिश्चित करने के लिए कुपोषण की पहचान, जागरूकता और सही समय पर चिकित्सकीय प्रबंधन ही जीवन का आधार है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) एवं महिला एवं बाल विकास विभाग के नैदानिक मानकों के अनुसार कुपोषण की श्रेणियां:
यह एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा स्थिति है जिसमें बच्चे का वजन उसकी लंबाई के अनुपात में अत्यधिक कम हो जाता है। इसमें तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप आवश्यक है।
मध्यम तीव्र कुपोषण में बच्चे का वजन सामान्य स्तर से नीचे गिर जाता है। यद्यपि यह तुरंत जानलेवा नहीं है, पर ध्यान न देने पर यह SAM में बदल सकता है।
यह बच्चे के जीवन के शुरुआती दिनों (विशेषकर पहले 1000 दिनों) में पौष्टिक आहार और लगातार बीमारी के कारण होने वाले क्रॉनिक (दीर्घकालिक) विकास अवरोध को दर्शाता है।
यह हाल ही में भोजन की तीव्र कमी या दस्त जैसी किसी गंभीर बीमारी के कारण अचानक तेजी से वजन घटने की स्थिति (एक्यूट कुपोषण) को दर्शाता है।
यह स्टंटिंग (ठिगनापन) और वेस्टिंग (सूखापन) दोनों का एक मिश्रित संकेतक है, जो दर्शाता है कि बच्चा अपनी उम्र के सामान्य बच्चों की तुलना में बहुत हल्का है।
शरीर में विटामिन ए, आयरन, आयोडीन और आवश्यक प्रोटीन की भारी कमी से अंगों का सामान्य कार्य प्रभावित होता है, जिसे 'छिपी हुई भूख' भी कहते हैं।
स्वस्थ बच्चे की शारीरिक लंबाई और वजन उसकी उम्र के अनुसार बिल्कुल सही अनुपात में होते हैं। उसका मानसिक और शारीरिक विकास तीव्र व संतुलित होता है।
मापने की विधि और लक्षणों को नीचे दिए गए रंग-코드ित इंटरैक्टिव टूल्स से समझें।
बाएं हाथ की मध्य भुजा की गोलाई (MUAC) मापने वाले टेप का लाइव प्रदर्शन। स्लाइडर को खिसकाएं:
12.5 सेमी से अधिक की माप सामान्य श्रेणी को दर्शाती है। बच्चे को संतुलित आहार देते रहें।
कुपोषण से शरीर में होने वाले बदलावों को देखने के लिए चमकीले बिंदुओं (Hotspots) पर क्लिक करें:
कुपोषण के शारीरिक लक्षणों की पहचान करने के लिए बिंदुओं को छुएं।
आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों (ANM/Mitanin) के लिए चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका
सटीक रूप से कुपोषित बच्चों की पहचान करने के लिए आंगनबाड़ी केंद्रों पर निम्नलिखित चरणों का कड़ाई से पालन करें:
माह में एक बार प्रत्येक बच्चे का वजन और लंबाई मापें। लंबाई के लिए स्टैडियोमीटर और शिशुओं के लिए इन्फेंटोमीटर का उपयोग करें। डब्ल्यूएचओ विकास चार्ट से मिलान करें।
6 माह से 5 वर्ष के बच्चों में तिरंगे MUAC टेप से बाएं हाथ के बीच के हिस्से को मापें। लाल पट्टी SAM (<11.5 cm) और पीली पट्टी MAM (11.5-12.5 cm) दर्शाती है।
बच्चे के दोनों पैरों के पंजों को अंगूठे से 10 सेकंड तक धीरे से दबाएं। यदि गड्ढे (सूजन) बने रहते हैं, तो यह गंभीर कुपोषण (Kwashiorkor) का लक्षण है। यह आपातकाल है।
पहचाने गए गंभीर कुपोषित बच्चे को शांत वातावरण में बैठकर RUTF (रेडी-टू-यूज़ फूड) खिलाकर देखें। यदि बच्चा चाव से नहीं खाता या मना करता है, तो वह 'भूख परीक्षण में फेल' माना जाता है।
यदि बच्चा गंभीर कुपोषित (SAM) पाया जाता है, तो स्वास्थ्य कार्यकर्ता (ANM) द्वारा तुरंत निम्नलिखित जटिलताओं की जांच की जाती है:
बच्चे को तुरंत नजदीकी सरकारी पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) में संदर्भित किया जाना चाहिए, जहां 14 दिनों तक डॉक्टर और न्यूट्रिशनिस्ट की देखरेख में विशेष चिकित्सीय उपचार दिया जाएगा।
बच्चे को घर पर ही समुदाय-आधारित तीव्र कुपोषण प्रबंधन (C-MAM) कार्यक्रम के तहत ठीक किया जा सकता है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की देखरेख में उसे विशेष सप्लीमेंट और आरयूटीएफ दिया जाएगा।
विभाग द्वारा प्रदाय किए गए निम्नलिखित आधिकारिक चार्ट को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अपनी पहचान प्रक्रिया को पुख्ता करने के लिए उपयोग कर सकती हैं।
📌 विभागीय दिशा-निर्देश चार्ट — बच्चे के विकास एवं पोषण स्थिति निर्धारण का मापदंड | ⬇ डाउनलोड करें
कुपोषण से मुक्ति पाने और नवजात शिशु से लेकर 5 वर्ष तक के बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए सामुदायिक स्तर पर इन पांच सुनहरे नियमों का पालन आवश्यक है:
गर्भवती महिला को नियमित रूप से संतुलित आहार, दिन में दो बार विश्राम, कम से कम 4 प्रसव पूर्व जांच (ANC), और डॉक्टर की सलाह पर नियमित आयरन, फोलिक एसिड एवं कैल्शियम की गोलियां लेना सुनिश्चित करना चाहिए।
शिशु के जन्म के तुरंत बाद (1 घंटे के भीतर) माँ का पहला पीला गाढ़ा दूध (कोलोस्ट्रम) जरूर पिलाएं। यह बच्चे के लिए पहला टीका है। पहले 6 महीने तक केवल माँ का दूध दें, पानी भी नहीं।
शिशु के 6 माह पूरे होने पर स्तनपान के साथ-साथ अर्ध-ठोस पौष्टिक पूरक आहार (जैसे मसली हुई दाल, दलिया, फल, खिचड़ी) देना शुरू करें। उम्र बढ़ने के साथ आहार की मात्रा, गाढ़ापन और बारंबारता बढ़ाएं।
भोजन पकाने, परोसने और खिलाने से पहले तथा शौचालय के उपयोग के बाद साबुन से हाथ धोएं। बच्चे के खिलौने साफ रखें और पीने के लिए सुरक्षित व उबला हुआ पानी ही इस्तेमाल करें ताकि डायरिया व संक्रमण से बचाव हो।
बच्चे का संपूर्ण टीकाकरण कार्ड के अनुसार समय पर कराएं। हर माह आंगनबाड़ी केंद्र में बच्चे का वजन व ऊंचाई मापें ताकि विकास चार्ट से उसकी शारीरिक प्रगति पर नजर रखी जा सके और किसी भी गिरावट पर तुरंत उपचार हो।